हिंदी ही क्यों?

hindi सित. ०८, २०१९


आप पूछना चाहेंगे की आख़िर तनूजा के लिए हमने हिंदी को ही क्यों चुना? हिंदी एक शानदार भाषा है मगर उससे भी अधिक महत्वपूर्ण कारण यह है की हिंदी भाषा हमारे देश की ज़ुबान है और जिस मुहिम पर हम निकले हैं उसमें कामयाबी के लिए बहुत ज़रूरी है कि हमारी बात हर हिंदुस्तानी तक पहुँचे। हिंदी ऐसा करने का एक बेहद कारगर माध्यम है।

जो लोग हिंदी को कमतर आँकते हैं उन्हें यह विडीओ देखकर आश्चर्य होगा की विदेशों में भी हिंदी की पढ़ाई की जाती है। आप अपने बच्चों को अंग्रेज़ी मीडीयम स्कूल भेज भेज कर अपनी जेभें ख़ाली कर रहे हैं और विश्व हिंदी को पढ़ना और समझना चाहता है। मैं अंग्रेज़ी की पढ़ाई और उपयोग के ख़िलाफ़ बिलकुल नहीं हूँ किंतु मैं हिंदी के पिछड़ते स्तर को देखकर थोड़ा चिंतित हूँ। मैं घबरा जाता हूँ जब ऐसे लोगों से मिलता हूँ जो पूरी ज़िंदगी भारत में रहकर हिंदी में गिनती नहीं जानते।

विदेश में पिछले कई सालों से रहने के बावजूद हम आज भी अपने बच्चों से और आपस में हिंदी में बात करते हैं। मेरी बड़ी बिटिया बहुत अच्छी अंग्रेज़ी बोलती है मगर फिर भी उससे हिंदी में बात करने पर जो आत्मीयता महसूस होती है उसका शब्दों में बयान कर पाना बेहद मुश्किल है।

हमारी सभ्यता और संस्कृति में हिंदी का एक अहम योगदान है। संस्कृत को आज कितने लोग पढ़ और समझ सकते हैं? ऐसा इसलिए हुआ की लोगों ने बाहर से आयी हुई भाषाओं को अधिक श्रेष्ठ समझा (और कुछ हद तक ब्रिटिश राज भी इसके लिए ज़िम्मेदार है)। क्योंकि आप संस्कृत नहीं पढ़ सकते आप वेद और उपनिषदों में निहित ज्ञान का लाभ नहीं उठा सकते। आपको जानकार शायद आश्चर्य होगा की वेदों और उपनिषदों में गणित, दर्शन (फ़िलोसोफ़ी) और आध्यात्म का ऐसा भंडार निहित है जो जल्द ही लुप्त हो जाएगा क्योंकि ना तो हमारे शिक्षा कार्यक्रम में संस्कृत का कोई अहम स्थान है और ना ही लोगों की इसमें कोई रूचि।

अपनी धरोहर को संजो कर रखें और हिंदी बोलने तथा सीखने में गर्व महसूस करें।


प्रदीप सिंह

मेरा नाम प्रदीप है और में यहाँ एक मेहमान लेखक हूँ। अपने व्यग्तिगत जीवन में मैं दो चुलबुली बेटीयों का पिता होने की वजह से मुझे नारी व्यक्तित्व को बेहद नज़दीक से देखने का अवसर प्राप्त हुआ है।