गृहिणी (Home maker)

housewife अग. २६, २०१९


गृहिणी (home maker - house wife) - घर का वो मज़बूत स्तम्भ जिसके उपर पूरा घर टिका होता है।जो अपना पूरा जीवन अपने बच्चों,पति और बाक़ी परिवार के लिए बिताती है। बिना किसी छुट्टी के। घर की साफ़ सफ़ाई से लेकर, बच्चों को स्कूल छोड़ना, वापिस लाना, बच्चों की पढ़ाई, बाज़ार जाके सब्ज़ी भाजी लाने, बच्चों के प्रोजेक्ट बनवाने, सास - ससुर की सेवा,पति के कपड़े धोना, प्रेस करना, सब के लिए तीनो टाइम का खाना पकाने जैसे कितने ही और छोटे - मोटे घर के सब काम अकेली करती है। जिन कामों की सूची को पढ़ने में आपको एक मिनट भी नहीं लगा उसे करने में एक गृहिणी को पूरा दिन लग जाता है और विडम्बना इस बात की नहीं है क़ि गृहिणी को इतना सब करना पड़त्ता है बल्कि इस बात की है क़ि दिन के अंत में उसे एक ही बात सुनने को मिलती है "तू पूरा दिन घर में ही तो रहती है करती क्या है पूरा दिन"।

आप अंदाज़ा भी नहीं लगा सकते की पूरा दिन बिना किसी आराम के काम करके दिन के अंत में ये सुनने को मिले तो कैसे लगता है।है।हमारी सोच नकारात्मक होती चली जाती है और हमें भी लगने लग जाता है कि हमारा जीवन तो बेकार है जो औरतें नोकरी करती है सिर्फ़ समाज और परिवार में उनका ही सम्मान होता है। एक ग्रहिनी का नहीं।ये सिर्फ़ एक ग्रहिनी की बात नहीं बल्कि समस्त ग्रहिनियों की है।है।हमारी ये सोच ग़लत भी हो सकती है ।कई लोग ग्रहिनियों की सराहना (appreciate) भी करते है पर मै  यहाँ उन लोगों की नहीं बल्कि उनकी बात कर रही हूँ जो हमारे काम की सराहना (appreciate) नहीं करते। वो लोग समझ लेते है कि घर का काम भी कोई काम है इसको करने में क्या मुस्किल है।जो लोग ऐसा मानते है वो 7 दिन घर का काम करके देख ले उनको अच्छे से समझ आ जाएगा कि क्या फ़र्क़ है। हमारी ये सोच ग़लत भी हो सकती है। कई लोग गृहिणी की सराहना (appreciate) भी करते है पर मै यहाँ उन लोगों की नहीं बल्कि उनकी बात कर रही हूँ जो हमारे काम की सराहना (appreciate) नहीं करते। वो लोग समझ लेते है कि घर का काम भी कोई काम है इसको करने में क्या मुस्किल है।जो लोग ऐसा मानते है वो 7 दिन घर का काम करके देख ले उनको अच्छे से समझ आ जाएगा कि क्या फ़र्क़ है।

जब एक औरत अपने पति के द्वारा किए काम को सराहती (appreciate) है। उसकी हर पसंद नापसंद का ध्यान रखती है। हफ़्ते में जो एक दो छुट्टी होती है उसमें भी उसके आराम का पूरा ध्यान रखती है। पर क्या कोई पति एक दिन के लिए भी ऐसा करता है। कभी आज तक किसी पति ने बोला है कि “तू पूरा हफ़्ता काम करके थक़ जाती होगी आज तू आराम कर मै घर का काम करता हूँ” नहीं ना!

क्या आप लोगों को नहीं लगता कि हम भी इंसान ही हैं अगर आपको हफ़्ते में एक या दो दिन आराम करने का अधिकार है तो हमें भी महीने में तो एक दिन आराम करने का अधिकार होना चाहिए।जो कपड़े हम पहनती हैं वो पति की मर्ज़ी से, कहीं जाना है वो पति की मर्ज़ी से, हमें अपने जीवन में कुछ भी करना है वो पति की मर्ज़ी से।अगर पति की मर्ज़ी नहीं तो वो कुछ नहीं कर सकती। यहाँ तक की समाज में कहाँ उठना - बैठना है, किससे बात करनी है किससे नहीं। इन सब बातों हाँ निर्णय भी पति ही लेता है।

इन सब बातों को जानते हुए भी मैं ये निर्णय नहीं ले पा रही हूँ कि आख़िर ऐसा क्यों है? कुछ बदलाव तो ज़रूर हुआ है पर उतना नहीं जितना होना चाहिए।मुझे लगता है आज एक गृहिणी की जो स्तिथि है उसकी वो ख़ुद ही ज़िम्मेदार है।जो हम करती हैं उसपे सबसे पहले हमें ख़ुद को गर्व होना चाहिए। हम लोग ख़ुद ही इस बात पर गौरव नहीं करते की हम एक गृहिणी है और हमेशा एक व्यावसायिक महिला को अपने से बेहतर मानते हैं।जब हम ख़ुद को ही बेहतर नहीं समझेंगे तो दूसरों से ये उम्मीद करना ग़लत है। जहाँ तक पैसा कमाने की बात है एक गृहिणी दुनिया के किसी भी व्यवसाय में मिलने वाले किसी भी बड़े वेतन का कई गुना वेतन की हक़दार है।

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मेरा इस बारे में लिखने का एक ही मक़सद है कि हम गृहिणी अपने आपको किसी अन्य से बेह्तर समझें।हम इस बात को माने की जो हम कर रहें है वो दुनिया का सबसे महतवपूर्ण काम है। इस पूरी दुनिया मैं केवल हम ही हैं जो दूसरों के लिए निस्वार्थ भाव से काम करते हैं बिना किसी वेतन के। हमारे अलावा और कोई ऐसा नहीं कर सकता। हम ख़ुद अपनी अहमियत को समझ कर ही दूसरों को अपनी अहमियत समझा सकते हैं।

इसलिए आज के बाद शर्म से नहीं बल्कि गर्व से कहें "मैं एक गृहिणी हूँ"


सुमित सिंह

मेरा नाम सुमित सिंह है। मैंने इतिहास में स्नातकोत्तर किया है तथा मैं दो सुंदर बेटियों की माँ हूँ।मैंने यह ब्लॉग मेरे जैसी अन्य महिलाओं से बात करने के लिए बनाया हैं।