नारी शक्ति - स्नेहा नारायणन

sneha narayanan अग. १५, २०१९


आज से हम एक नयी शृंखला शुरू कर रहे हैं जिसका नाम है नारी शक्ति। यहाँ हम उन महिलाओं के काम के पेश करेंगे जो हम सब के लिए प्रेरणा का स्त्रोत हैं तथा जिनसे हम बहुत कुछ सीख सकते हैं। आज के हमारे लेख की नायिका हैं स्नेहा नारायणन! आइए उनके बारे में और जानते हैं।

Sneha Narayanan
स्नेहा नारायणन
स्नेहा नारायणन एक पुरस्कार विजेता ब्लॉगर, लेखिका और TED वार्ता प्रेरक वक्ता हैं। वह अखबारों में भी छपी है। उन्होंने 2018 में आईबीएम इंडिया में अपनी नौकरी छोड़ दी और महिलाओं को जमीनी स्तर पर सशक्त बनाने के लिए "स्नेहा एक्सप्रेशन" (Sneha's Expression) नामक एक सामाजिक पहल शुरू की, जहां वह सामाजिक वर्जनाओं  (social taboos)के बारे में बात करेंगी और महिलाओं से खुद के लिए खड़े होने का आग्रह करेंगी। ब्लॉगिंग में आने के 9 महीनों के भीतर, उसने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर एक पुरस्कार जीता और जून 2019 में लंदन में सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत विकास पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

स्नेहा को सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत विकास पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

newspaper clip of the report
स्नेहा को मिले पुरस्कार की ख़बर की अख़बार क्लिप।

स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष में स्नेहा अपने शब्दों आज हमारे साथ कुछ साँझा करना चाहती हैं।

Being daughter of an Army officer, I feel honoured to write down few words for all our soldiers. (एक सैनिक अफ़सर की बेटी होने के नाते  मैं हमारे सैनिकों के बारे में चंद पंक्तियाँ लिखकर बेहद सम्मानित महसूस कर रही हूँ।)

नीचे दी गयी अंग्रेज़ी कविता उन्होंने हमारे सैनिकों के सम्मान में लिखी है।

Ode To Soldiers (सैनिकों की स्तुति)
Facing adversities, soldiers risk their life.
Remember, they too could have stayed back and enjoyed with family and wife.
Family, holidays and pursuits of pleasure sacrificed in a trice.
Nation is in safe hands but at what price.
Cats have nine lives, A soldier has only one.
Beyond the call of duty, that’s sacrificed even.
Sometimes he gets a mention depending upon the occasion.
Pardon the pun, the deed is done.
The bugle has played the last post, a mother has lost her brave son.
All those in places mighty and high, once in a while, why can’t you think it could have been ‘I’?
A soldier has done what he must.
Let not his sacrifice go to dust.
Nation is safe at a price.
Lets honour the supreme sacrifice.

यह कविता इतनी सुंदर है की हम इसका अनुवाद इस कारण से नहीं करना चाहते की हम अनुवाद करते हुए इसमें निहित भावनाओं को पूरी तरह से व्यक्त नहीं कर पाएँगे।

उनके ब्लॉग पर जाने के लिए यहाँ क्लिक करें

आशा करती हूँ की आपको मेरी यह नयी सिरीज़ पसंद आएगी। अगर आप भी किसी ऐसी ही होनहार स्त्री को जानते हैं तो उनकी जानकारी हमें भेजें हम यहाँ उनके बारे मैं पोस्ट ज़रूर लिखना चाहेंगे। हमारा ईमेल ऐड्रेस है tanooja.com@gmail.com

क़ानूनी सूचना: इस लेख की सभी जानकारी स्नेहा की अनुमति और जानकारी के साथ प्रकाशित की जा रही है। लेख में प्रकाशित किए गए चित्र उन्होंने अपनी इच्छा से हमारे साथ केवल इस ब्लॉग पोस्ट के लिए साझा (शाएर) किए हैं। इन चित्रों का अवैध उपयोग या डाउनलोड ग़ैर क़ानूनी है तथा इसके प्रतिकूल परिणाम हो सकते हैं।


सुमित सिंह

मेरा नाम सुमित सिंह है। मैंने इतिहास में स्नातकोत्तर किया है तथा मैं दो सुंदर बेटियों की माँ हूँ।मैंने यह ब्लॉग मेरे जैसी अन्य महिलाओं से बात करने के लिए बनाया हैं।