प्रेम विवाह (Love Marriage) बनाम तयशुदा विवाह (Arranged Marriage)

arranged vs love अग. १७, २०१९


प्रेम विवाह एक ऐसा रिस्ता जिस पर आप हर वक्त नाज़ कर सकते है जिसमें फ़ैसले लेने की पूरी आज़ादी होती है। जिसमें हम हर वक्त आज़ाद महसूस करते है! पढ़ने में ये लाइन जितनी छोटी लग रही है जीवन में इसका इतना ही बड़ा महत्व है इसका महत्व वही लोग समझ सकते है जिनके पास ये आज़ादी नहीं है।

वहीं दूसरी तरफ़ तय (arranged) विवाह जिसमें आपके जीवन की पूरी डोर किसी और के हाथ मे रहती है कभी पिता के रूप में,कभी पति तो कभी समाज के रूप में! आप अपने जीवन का कोई भी फ़ैसला ले वो पूरी तरह आपका नहीं होगा। आपको हर फ़ैसला लेने के लिए दूसरों पे निर्भर होना पड़ेगा!

ये फ़र्क़ समझते  हुए भी हम हमेशा प्रेम विवाह के ख़िलाफ़ होते है - क्यों?
मैं यहाँ प्रेम विवाह की पैरवी नहीं कर रही और ना ही माता पिता द्वारा तय विवाह के ख़िलाफ़ हूँ बस आपको ये बताने की कोशिश कर रही हूँ की जिस तरह आप तय (arranged) विवाह को सही मानते है उसी तरह प्रेम विवाह को भी माने!

अपने बच्चों को अपना जीवन साथी चुनने का अधिकार दे! मैं जानती हूँ माता -पिता होने के नाते हमें चिंता होती है कि कहीं हमारा बच्चा कोई ग़लत इंसान ना चुन ले। मैं भी दो बेटियों की माँ हूँ और इस बात को बख़ूबी समझती हूँ पर आप मुझे एक बात बताइए क्या आप इस बात की पूरी ज़िम्मेदारी लेते है कि जिस इंसान का चुनाव आप करेंगे वो बिलकुल सही (prefect) इंसान होगा वो कभी आपकी बेटी को कोई परेशानी नहीं देगा? जब आपको इतने वर्षों का अनुभव होते हुए भी आप ये ज़िम्मेदारी नहीं ले सकते तो अपने बच्चों से ये उम्मीद क्यों?

दूसरी तरफ़ प्रेम विवाह में लोग एक दूसरे को समय देते है और एक दूसरे को समझते है फिर भी हम प्रेम विवाह के ख़िलाफ़ क्यों है जब भी कोई प्रेम विवाह करता है माता पिता अपने बच्चों से नाराज़ हो जाते है क्यों? क्योंकि उनके अनुसार समाज में उनकी नाक कट जाती है। मैं उन माता पिता से पूछना चाहती हूँ कि भगवान शंकर जिन्हें हम आदि योगी मानकर उनकी पूजा करते है उन्होंने भी तो प्रेम विवाह किया था। आपके अनुसार तो उनको भी ग़लत समझा जाना चाहिए फिर हम उनकी पूजा क्यों करते है? जब हम उनको अपना पूज्य मानते है तो प्रेम विवाह को ग़लत क्यों मानते है? समाज में नाक कटने  के डर से आप प्रेम विवाह को ग़लत समझते हैं। माता पिता द्वारा तय विवाह के बाद भी बाद जब उनकी लाइफ़ में कोई परेशानी आती है और जब आपकी बेटी वापस घर आ जाती है या फिर हर रोज़ लड़ाई झगड़े,मार पिटायी होती है, तलाक़ तक हो जाते है तब क्या आपकी नाक नहीं कटती? तब वो समाज क्या करता है क्या उस वक्त वो समाज आपके बच्चे के जीवन को सुधार सकता है? उस वक्त भी आपको ही फ़ैसला लेना होता है। समाज हमीं लोगों से बदलेगा जब हम ख़ुद के लिए अपनी ही अपनी सोच नहीं बदलेंगे तो समाज में बदलाव कहाँ से आएगा समाज भी तो हम ही है।

अपनी बात को अच्छे से समझाने के लिए मेरे पास एक कहानी है वो मैं आपको अगले ब्लॉग पोस्ट में बताऊँगी तब तक आप इस बारे में विचार करिए और मुझे अपनी राय बताइए की आप इस बारे में क्या सोच रखते है।


सुमित सिंह

मेरा नाम सुमित सिंह है। मैंने इतिहास में स्नातकोत्तर किया है तथा मैं दो सुंदर बेटियों की माँ हूँ।मैंने यह ब्लॉग मेरे जैसी अन्य महिलाओं से बात करने के लिए बनाया हैं।