प्रेम विवाह (Love Marriage) बनाम तयशुदा विवाह (Arranged Marriage) - भाग 2

arranged vs love अग. १८, २०१९


जिस कहानी की बात मैंने पिछले ब्लॉग पोस्ट में की थी वो कहानी मैं आपको अभी सुनने जा रही हूँ और मैं दावे के साथ कह सकती हूँ की ये कहानी सुनने के बाद आप एक बार इस बारे में ज़रूर सोचने पे मजबूर होंगे।

एक पिता की तीन बेटियाँ थी। तारा, सितारा और ज्वाला, जानती हूँ कि इस कहानी में ये नाम कुछ अजीब लगेंगे पर इस कहानी में इनके नाम का बहुत महत्व है। पहली तारा - जैसा कि नाम है चारों तरफ़ अँधेरा होते हुए भी हमेशा चमकते रहना। इसने पूरे परिवार तथा समाज के ख़िलाफ़ जाकर प्रेम विवाह किया। इसके इस फ़ैसले से सब नाराज़ हो गए और पिता ने समाज के डर से इसको अपने जीवन से बाहर निकाल दिया।

अब कुछ दिन बाद सितारा और ज्वाला की राजा ने अपनी पसंद के लड़कों से शादी कर दी कुछ दिन के बाद वही हुआ जो बहुत बार होता है लड़ाई -झगड़े और मार – पीट। जब दोनो लड़कीयो ने अपने पिता को ये बात बतायी तो पिता ने पहले ससुराल वालों को बहुत समझाया यानी अपना फ़र्ज़ निभाया, जिसका पिता ने उनकी शादी पे वादा किया था। लेकिन बहुत कोशिशों के बाद भी बात नहीं बनी और कोई समाधान होने से पहले ही पिता निकल लिया यानी मर  गया। अब बची सितारा और ज्वाला की माँ। अब इनकी माँ क्या करेगी आप अंदाज़ा लगा सकते हैं वही जो हर माँ बोलती है “समझौता”। सितारा - जैसे नाम से ही स्पष्ट होता है – जिसके सूर तो बहुत मधुर बजते हैं पर कोई भी अपनी मर्ज़ी से बजा सकता है।इसने अपनी माँ की बात मानी और समाज में अपने माँ की नाक को बचाने के लिए और समाज में जवाब देना पड़ेगा क़ि मैं शादी होने के बावजूद भी मैं मायके में क्यों हूँ इस डर से समझौता कर लिया।

अब बारी आयी ज्वाला की जैसा की नाम से ही स्पष्ट होता है - जिसके अंदर बहुत सी रोशनी होती है - रोशनी मतलब उम्मीद। इसने अपनी माँ की बात नहीं मानी और संघर्ष करती रही और अंत में जब कोई रास्ता नहीं बचा पंचायत करने का फ़ैसला किया गया। पंचायत मतलब -भाई, चाचे, ताये, मामा, फूफा, गाँव – मोहल्ले के लोग सब इकट्ठा हो गए और सबने दोनो का तलाक़ लेने का फ़ैसला किया। अब वो मायके आकर रहने लगी।

ये नहीं है की तारा के जीवन में कोई मुसीबत नहीं आई। आई पर क्योंकि तारा अपने जीवन साथी को पहले से ही जानती थी और समझती थी - इसके जीवन का फ़ैसला किसी भाई, मामे, चाचे ने नहीं बल्कि इसने ख़ुद किया क्योंकि इसके पास फ़ैसला लेने का अधिकार था जो तयशुदा विवाह में नहीं होता।

भाई होता तो कहानी कुछ और होती पर ऐसा बिलकुल नहीं है इनका भी भाई था पर इस कहानी में उसका कोई रोल नहीं था। इसलिए मैंने उसका ज़िक्र नहीं किया। जब माता- पिता  होते हुए भी हम अपने बच्चों के लिए सही निर्णय नहीं ले सकते तो भाई क्या करेगा।

अब आप मुझे ये बताए की इस कहानी में माता पिता की कथित नाक तो फिर भी कट गयी ना। जिस समाज के डर से इनके पिता ने अपनी दो बेटियों का विवाह अपनी पसंद से किया था, क्या वो बेटियाँ आज ख़ुश है? क्या उनके पास अपने जीवन से सम्बंधित कोई भी निर्णय लेने की शक्ति है? पर तारा आज ख़ुश भी है और उसके पास निर्णय लेने की शक्ति भी है। उसके जीवन के सब फ़ैसले वो ख़ुद लेती है कोई और नहीं। आज तारा के पिता तो नहीं है पर तारा की माँ को अपनी बेटी और दामाद पे नाज़ है।

अब आप मुझे बताइए तीनो बेटियों में से आपको किसका फ़ैसला सही लगा। मैं तयशुदा विवाह के ख़िलाफ़ नहीं हूँ बस आपको केवल इतना बताना चाहती हूँ की तयशुदा विवाह ऐसे दो लोगों का मेल है जो ना एक दूसरे को जानते है ना समझते है। यह अंधरे में तीर चलने के बराबर ही मानती हूँ मैं। निशाने पे लग गया तो सही नहीं तो पूरा दोष क़िस्मत पे डाल दो।

आप इस बारे में क्या राय रखते है मुझे कॉमेंट करके ज़रूर बताइएगा।


सुमित सिंह

मेरा नाम सुमित सिंह है। मैंने इतिहास में स्नातकोत्तर किया है तथा मैं दो सुंदर बेटियों की माँ हूँ।मैंने यह ब्लॉग मेरे जैसी अन्य महिलाओं से बात करने के लिए बनाया हैं।