अधिक लैंगिक समानता (Gender Equality) का अर्थ है 2025 तक 31% जीडीपी वृद्धि

gender equality सित. ०२, २०१९


यूरोप में, लैंगिक समानता (Gender Equality) और प्रतिनिधित्व के संबंध में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है। कॉर्पोरेट बोर्डों में महिलाओं का प्रतिशत पिछले 15 वर्षों में 3 गुना बढ़ गया है।

बैंक ऑफ अमेरिका-मेरिल लिंच की रिपोर्ट में कहा गया है कि महिलाओं की समानता को बढ़ावा देने से 2025 तक वैश्विक जीडीपी में 20% या 28 ट्रिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हो सकती है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 2020 तक महिलाएं दुनिया की 72 ट्रिलियन डॉलर की वित्तीय संपत्ति रखेंगी जो कि 2010 के स्तर से दोगुनी है और रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में 1.5 गुना अधिक संपत्ति जमा करती हैं।

हालांकि, रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है। आर्थिक लिंग अंतर (economic gender gap) बहुत धीमी गति से कम हो रहा है और वर्तमान गति से यह अंतराल सदियों तक कम नहीं होगा। इस अंतर को ख़त्म करने के लिए 202 साल का समय लगेगा।

विविधता पर ध्यान केंद्रित करने के बावजूद, अमेरिका तक भी वेतन और नीतिगत मामलों में  अन्य विकसित देशों से काफ़ी पीछे है। इसके अलावा, कॉर्पोरेट अमेरिका का हाल मुख्य अमेरिका के समाज की तरह नहीं दिखता है: एस एंड पी 500 बोर्ड सीटों पर औसत अनुपात हर महिला के लिए चार पुरुष है; सिर्फ 5% कंपनियों में शीर्ष पर एक महिला है। S & P 600 एक स्मॉल कैप इंडेक्स है, जो हाल ही में स्थापित निगमों को दर्शाता है। यह और भी बदतर आंकड़े दिखाता है।

उज्जवल पक्ष में, रिपोर्ट बताती है, लिंग अंतर को कम करने के लिए प्रोत्साहन स्पष्ट हैं: एक बोर्ड, सी-सूट और फर्म स्तर पर लिंग विविधता पर केंद्रित कंपनियों ने बाद के वर्षों में लगातार उच्च आरओई (यानी अधिक मुनाफ़ा) और कम आय जोखिम को हासिल किया है। इसके अलावा, विविधता पर केंद्रित कंपनियों ने आम तौर पर अपने जैसी कम्पनियों से उच्च मूल्यों पर स्टॉक बाज़ार में कारोबार किया है - अर्थात ऐसी कम्पनियों के शेयर अधिक मूल्य पर बिकते हैं।

वैश्विक लैंगिक अंतर के आँकड़े (प्रतिशत में)

यूरोप में, लैंगिक समानता और प्रतिनिधित्व के संबंध में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है। कॉर्पोरेट बोर्डों में महिलाओं का प्रतिशत पिछले 15 वर्षों में 3 गुना बढ़ गया है। महिलाओं ने वहाँ कार्यकारी पदों में पिछले पाँच वर्षों में 60% की छलांग लगाई है, जिसकी वजह से प्रत्येक 6 में से 1 सदस्य अब एक महिला हैं। इसके अलावा, 2020 के लिए यूरोपीय आयोग के लक्ष्यों में से एक की वजह से प्रवृत्ति में वृद्धि होने की उम्मीद है। उनका लक्ष्य महिलाओं के लिए रोजगार की दर को मौजूदा 64% से 75% तक बढ़ाना है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इक्विटी निवेशकों को सकारात्मक रूप से ऐसे शेयरों को लेना चाहिए, जिनके बोर्डों पर बढ़ती विविधता दिखाई देती है क्यूँकि इसकी वजह से कमाई और लाभांश में कम अस्थिरता आती है।

एशिया पैसिफ़िक के देशों में महिलाओं की भागेदारी (भारत के दशा काफ़ी ख़राब है)

एशिया में, महिलाओं का जनसंख्या में 49% और सकल घरेलू उत्पाद में 36% योगदान है, लेकिन बोर्ड की सिर्फ़ 12% सीटों पर ही महिलाओं का कब्जा है और केवल 3% सीईओ पदों पर एक महिला है। एशियाई बोर्डों पर बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच के आंकड़ों से पता चलता है कि लैंगिक विविधता की कमी सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों और उपभोक्ता विवेकाधीन क्षेत्रों में सबसे अधिक है - अर्थात इन कम्पनियों में सबसे कम महिलाएँ हैं। हालांकि, कम से कम दो महिला बोर्ड सदस्यों वाली कम्पनियों के एशिया पैसिफिक के शेयरों में अधिक स्टॉक प्रीमियम, और बेहतर शुद्ध लाभ मार्जिन (Net Profit) (+ 3%) और लाभांश देखा गया है।

“लैंगिक अंतर को ख़त्म करने के लिए बहुत कुछ किया जाना चाहिए लेकिन समान वेतन और सरकारी सहायता प्राप्त चाइल्डकैअर के समर्थन के लिए शिक्षा और कानूनों में प्रगति की जा रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि विशेषज्ञ मानते है की महिलाओं की अधिक भागेदारी से हम  $ 3.2 ट्रिलियन से $ 4.5 ट्रिलियन तक घरेलू उत्पाद में बढ़ोतरी देख सकेंगे।

इस अंतर को काम करने के लिए हमें कुछ मज़बूत क़दम उठाने होंगे जैसे की लड़कियों की शिक्षा और प्रशिक्षण पर ज़ोर देना, समाज में उनके लिए ज़्यादा सुरक्षित और माक़ूल माहौल बनाना, लड़कियों को हर मामले में लड़कों की बराबरी का स्थान देना और यह सब हम सबके प्रयासों से मुमकिन हो पाएगा। आइए इन्हें पंख दें।


प्रदीप सिंह

मेरा नाम प्रदीप है और में यहाँ एक मेहमान लेखक हूँ। अपने व्यग्तिगत जीवन में मैं दो चुलबुली बेटीयों का पिता होने की वजह से मुझे नारी व्यक्तित्व को बेहद नज़दीक से देखने का अवसर प्राप्त हुआ है।