शिक्षा या दहेज?

daughters अग. १३, २०१९


लड़की का जन्म होते ही माता-पिता को उसकी शादी और दहेज की चिंता होने लगती है। मेरा उन माता पिता से कहना है कि जो पैसा आप अपनी बेटी के दहेज के लिए जमा करते हैं वही  पैसा आप अपनी बेटी की पढ़ाई में लगाएँ ताकि वो इस क़ाबिल बन सके कि वो जो चाहे अपने दम पर पा सके। आपका दिया हुआ दहेज का सामान और पैसा सिर्फ़ घर की शोभा और ससुराल वालों की फ़िज़ूल खर्ची बढ़ाने का काम करता है।आपकी बेटी को ना तो वो आत्मविश्वास और ना ही वो क़ाबिलियत मिलती है जो जीवन में हर क़दम पर स्वाभिमान के साथ जीने में उसकी मदद करेंगी। शिक्षित होकर आपकी बेटी हमेशा बराबरी की भावना के साथ जीवन में हर काम करेगी।

जीवन में जब मुश्किल वक़्त आता है तो ख़ुद की क़ाबिलियत के अलावा कुछ भी काम नहीं आता। प्राचीन काल में दहेज बेटी को दिया हुआ उपहार हुआ करता था। अगर आप देखेंगे तो पाएँगे हमारे किसी भी धर्म ग्रंथ में इसका बहुत विस्तृत वर्णन नहीं मिलता। दहेज के रिवाज की शुरुआत के कई अलग अलग मत हैं मगर हर मत एक बात पर ज़रूर एकमत है की ऐसा कोई रिवाज सनातन धर्म के किसी भी ग्रंथ में नहीं है। ज़्यादातर पुरानी किताबों और कहानियों में स्वयमवर प्रथा का ज़िक्र मिलता है जिसका अर्थ है की शादी के लिए लड़कों को अपनी क़ाबलियत साबित करनी पड़ती थी। इसका एक अर्थ और है की हमारे समाज में बेटियाँ कभी बोझ नहीं समझी जाती थी। अगर आप इसके बारे में और ज़्यादा पढ़ना चाहते हैं तो आप इस लिंक पे जाकर पढ़ सकते हैं।

मुझे लगता है जो माता पिता शिक्षा की जगह दहेज में ज़्यादा विश्वास रखते हैं उन्हें ख़ुद शिक्षा के महत्व के बारे में नहीं मालूम होता और ऐसा हमारी सामाजिक व्यवस्था की वजह से जिसके कारण माता पिता इसको परिवार की इज़्ज़त से जोड़ कर देखते हैं। मेरी ऐसे माता पिता से विनती है की आप अपने आस पास ऐसे परिवारों को देखें जहाँ पढ़ाई लिखाई और बेटियों की बराबरी को ज़रुरी समझा जाता है तो वे पाएँगे की आम तौर पर ऐसे परिवारों में माता पिता को इस बात की चिंता करने की कभी ज़रूरत नहीं पढ़ती की अगर उनकी बेटी कभी उनपर बोझ बन जाएगी। ऐसी बेटियाँ कभी भी किसी क़िस्म का शोषण सहन नहीं करती।

मेरी नज़र में दहेज की रीति ठीक वैसी है जैसे दुकानदार घटिया चीज़ को बेचने के लिए उसके साथ दूसरी चीज़ें मुफ़्त देते हैं। क्या आप भी अपने आप को वही दुकानदार समझते हो या बनना चाहते हो? बात थोड़ी कड़वी ज़रूर है लेकिन अगर आप एक गिलास ठंडे पानी के साथ बैठकर सोचेंगे तो पाएँगे को किसी भी हालात में दहेज के मुक़ाबले शिक्षा एक बेहतर सौदा है और अपनी बेटी को इससे बेहतर कोई उपहार नहीं दे सकते।


सुमित सिंह

मेरा नाम सुमित सिंह है। मैंने इतिहास में स्नातकोत्तर किया है तथा मैं दो सुंदर बेटियों की माँ हूँ।मैंने यह ब्लॉग मेरे जैसी अन्य महिलाओं से बात करने के लिए बनाया हैं।