साहसी मानसी जोशी एक भारतीय पैरा-बैडमिंटन एथलीट

women empowerment सित. ०३, २०१९


मानसी जोशी एक भारतीय पैरा-बैडमिंटन एथलीट हैं, विकलांग होते हुए भी वो आज SL3 एकल में वर्ल्ड नंबर 2 हैं।जब ये छह साल की थी जब उसने अपने पिता के साथ भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के एक सेवानिवृत्त वैज्ञानिक के साथ बैडमिंटन खेलना शुरू किया। सोमैया कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, मुंबई विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। 2011 में, वह एक सड़क दुर्घटना के साथ मिले और अपना बायां पैर खो दिया। विकलांग होने के बावजूद, उन्होंने 2018 में प्रशिक्षण के लिए हैदराबाद में  गोपीचंद बैडमिंटन अकादमी में दाखिला लिया। सितंबर २०१५ में, उन्होंने इंग्लैंड के स्टेंडा मैंडविल में आयोजित पैरा-बैडमिंटन विश्व चैम्पियनशिप में मिश्रित युगल में रजत पदक जीता। october 2018 में, मानसी ने इंडोनेशिया के जकार्ता में आयोजित एशियन पैरा गेम्स 2018 में भारत के लिए कांस्य पदक जीता। उसने बैसेल, स्विट्जरलैंड में आयोजित पैरा-बैडमिंटन विश्व चैम्पियनशिप 2019 में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता।

पदक  मिश्रित युगल पैरा-बैडमिंटन विश्व चैंपियनशिप में 2015 का पदक 2016 पैरा-बैडमिंटन एशियाई चैंपियनशिप में कांस्य महिला एकल और महिला युगल 2017 महिला एकल पैरा-बैडमिंटन विश्व चैंपियनशिप में कांस्य 2018 थाईलैंड पैरा-बैडमिंटन इंटरनेशनल में महिला एकल में कांस्य पदक 2018 एशियाई पैरा खेलों 2018 में महिला एकल में कांस्य पदक पैरा-बैडमिंटन विश्व चैम्पियनशिप, बेसेल, स्विट्जरलैंड में महिलाओं के एकल में 2019 का स्वर्ण पदक जिता।

मानसी एक उदाहरण हैं सब लड़कियों के लिए । इन्होंने साबित कर दिया की किसी चीज़ को पाने का अगर आपमें जज़्बा है तो कोई भी बाधा हो आप उसे पार करके अपनी मंज़िल को पा ही लेते हैं ।



सुमित सिंह

मेरा नाम सुमित सिंह है। मैंने इतिहास में स्नातकोत्तर किया है तथा मैं दो सुंदर बेटियों की माँ हूँ।मैंने यह ब्लॉग मेरे जैसी अन्य महिलाओं से बात करने के लिए बनाया हैं।